Tai 鯛
रेड सी ब्रीम
शुभ मानी जाने वाली, प्राचीन काल से लोकप्रिय
ताई (रेड सी ब्रीम) प्राचीन काल से उत्सवों में इस्तेमाल होती आई है और शुभ मछली के रूप में प्रिय रही है। एदो काल में बढ़िया ताई शोगुन को भेंट किए जाने वाली प्रमुख चीज़ों में से एक हुआ करती थी।
इसका गूदा सफ़ेद और हल्के, फीके स्वाद वाला होता है, पर इसकी ख़ासियत है खाल के ठीक नीचे मौजूद उमामी तत्व। सुशी के रूप में परोसे जाने पर भी इसे थोड़ी खाल लगी हुई हालत में परोसा जाता है। मछली-पालन भी ख़ूब होता है, पर इस पर ठीक-ठाक चर्बी चढ़ी होती है और यह जंगली किस्म से कम लोकप्रिय नहीं। छोटी वाली को ज़्यादा स्वादिष्ट माना जाता है, और कहते हैं कि ४० से ५० सेंटीमीटर के आस-पास की सबसे लोकप्रिय है।
उत्पादन-क्षेत्र के हिसाब से इसका मौसम बदलता है: होक्काइदो और तोहोकु में “वसंत” अच्छा माना जाता है, जबकि कांतो से लेकर क्यूशू तक मुख्यतः “पतझड़” — इसलिए साल भर कहीं-न-कहीं मौसमी ताई मिल ही जाती है। वैसे, इन्हें क्रमशः सकुरा-दाई (चेरी-ब्लॉसम ताई) और मोमिजी-दाई (मेपल ताई) भी कहा जाता है।
उद्गम: पूरे देश में मौसम: किस्म के हिसाब से अलग-अलग। मा-दाई की सर्दी से वसंत तक