मिरुगाई क्लैम
संग्रह

Miru-gai ミル貝

मिरुगाई क्लैम

होनमिरु? या शिरोमिरु?

श्रेणी
शंख-सीप
मौसम
साल भर

मिरु-गाई का “मिरु” आख़िर है क्या? बहुत-से लोग शायद नहीं जानते होंगे। कांजी में इसे “海松” लिखते हैं और “मिरु” पढ़ते हैं। यह एक तरह की समुद्री शैवाल (काई) है, यानी एक पौधा। मिरु-गाई की साइफ़न (पानी की नली) पर मिरु उगा होता है, और चूँकि लगता है कि यह मिरु खाता होगा, इसी वजह से इसे मिरु-कुई (मिरु खाने वाला) या मिरु-कुई-गाई कहा जाने लगा, ऐसा कहते हैं।

सुशी में परोसी जाने वाली मिरु-गाई दो किस्मों की होती है — “मिरु-गाई (海松貝)” और “शिरो-मिरु (白海松)” — पर शिरो-मिरु सिर्फ़ देखने में मिलती-जुलती है, असल में यह बिलकुल अलग किस्म की सीप है। यानी एक तरह का विकल्प (सब्स्टिट्यूट)। फ़र्क़ करने के लिए मिरु-गाई को “होन-मिरु” (असली मिरु) भी कहते हैं।

होन-मिरु को खाने लायक़ आकार तक पहुँचने में १५ साल से ज़्यादा लगते हैं, ऐसा कहा जाता है, और सुशी सिर्फ़ बाहर निकली हुई साइफ़न वाले हिस्से से ही बनती है। एक सीप से बस एक या दो पीस ही निकलते हैं — यह एक बेहद महँगी नेटा है। इसलिए आम, कैज़ुअल सुशी रेस्तराँओं में दिखने वाली मिरु-गाई को ९९% शिरो-मिरु ही समझना बेहतर है।

इस पेज की तस्वीर शिरो-मिरु की है, पर इसमें भी हल्का कुरकुरा टेक्सचर और एक ख़ास मीठापन है — यह भी अपने आप में एक बेहद स्वादिष्ट सीप है।

उद्गम: देश के विभिन्न इलाक़े मौसम: सर्दी से वसंत तक

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