Maguro 鮪
टूना (मागुरो)
जापानियों का चहेता क्लासिक
सुशी का नाम सुनते ही अगर किसी जापानी के दिमाग़ में कुछ आता है, तो उसमें मागुरो (टूना) तो सबसे पहले होगा ही।
मागुरो का वज़न ४०० किलोग्राम तक होता है और इसके इस्तेमाल किए जाने वाले हिस्से बहुत बड़े दायरे में फैले होते हैं। शरीर के बीच के पास का लाल हिस्सा अकामी (लाल गूदा) कहलाता है, और उससे बाहर पेट की ओर जाने पर चर्बी बढ़ती जाती है, जिसे “तोरो” कहते हैं।
मागुरो की भी कई किस्में होती हैं, पर सबसे ऊँचे दर्जे की किस्म होन-मागुरो (कुरो-मागुरो, यानी ब्लूफ़िन टूना) कहलाती है, और उसमें भी आओमोरी प्रान्त के ओमा की ब्रांडेड टूना इस बात के लिए मशहूर है कि उसकी क़ीमत करोड़ों येन तक पहुँच जाती है। इसके अलावा, आजकल आम तौर पर बाज़ार में बिकने वाली टूना में सबसे बड़ा हिस्सा मेबाची-मागुरो (बिगआई टूना) का है, जो लगभग ४० प्रतिशत के क़रीब है। मागुरो कहो तो अकामी ही याद आता है, पर उसमें भी फीके-गहरे लाल रंग वाले गूदे को सबसे स्वादिष्ट माना जाता है।
मागुरो बेहद लोकप्रिय किस्म होने के कारण देश-विदेश में इसकी मछली-पालन (एक्वाकल्चर) तकनीक ख़ूब विकसित हुई है और हाल के वर्षों में बढ़ रही है। विदेशों में मेक्सिको और ऑस्ट्रेलिया जैसी जगहों की फ़ार्मिंग मशहूर है। वैसे, जीव-विज्ञान की दृष्टि से मागुरो “मैकरेल कुल” (साबा-का) में आता है।
मागुरो का अकामी कम चर्बी और ज़्यादा प्रोटीन वाला होता है। जो लोग स्ट्रेंथ ट्रेनिंग में डूबे हुए हैं, उन्हें भी यह नेटा ज़रूर चखना चाहिए।
उद्गम: जापान के आस-पास के समुद्रों से लेकर दुनिया भर के समशीतोष्ण इलाक़ों तक फैला हुआ मौसम: जमे हुए (फ़्रोज़न) रूप में काफ़ी बिकता है, इसलिए साल भर ठीक