Inari 稲荷
इनारी सुशी
क्या यह सचमुच सुशी है?
आधुनिक दौर में दुर्लभ क़िस्म की सुशी है यह, और पहली बार देखने पर इसकी शक्ल से बिलकुल समझ नहीं आता कि आख़िर यह है क्या। (शायद आजकल के जापानी इसे सुशी मानते ही न हों, पर अगर परंपरा का सम्मान करें तो यह बाक़ायदा सुशी है।)
इस रहस्यमय थैली में लिपटा हुआ कौन-सा समुद्री-भोजन है? मछली है अंदर? या कोई सीप है? — ऐसी उम्मीदें मन में फूल सकती हैं। पर अफ़सोस, अंदर सिर्फ़ सिरके वाले चावल हैं।
बाहर की थैलीनुमा चीज़ टोफ़ू का पानी निकालकर तेल में तली हुई होती है, जिसे “अबुरा-आगे” कहते हैं। इनारी सुशी में यह अबुरा-आगे मीठा-नमकीन पकाकर इस्तेमाल किया जाता है, और हैरानी की बात है कि सिरके वाले चावल के साथ इसकी जोड़ी अच्छी जँचती है — यह जापानी लोगों के नाश्ते (ओयात्सु) के रूप में भी चहेता खाद्य-पदार्थ रहा है।
अबुरा-आगे को इनारी देवस्थान (श्राइन) की लोमड़ी का प्रिय भोजन कहा जाता है, और यह इनारी देवस्थानों पर चढ़ाया जाता रहा है। इसी रिश्ते से इसे इनारी सुशी कहा जाने लगा, और एदो काल से यह आम लोगों के भोजन के रूप में फैलता रहा, ऐसा लगता है।
घरेलू स्वाद के रूप में इसकी पहचान मज़बूत है, इसलिए ऊँचे दर्जे के सुशी रेस्तराँओं में यह बहुत कम दिखाई देता है।
उद्गम: कोई ख़ास नहीं (पूरे देश में बनाया जाता है) मौसम: कोई ख़ास नहीं (जिस पल आपको लगे “इनारी सुशी खाने का मन है?”, वही इसका मौसम है)