Aji 鯵
हॉर्स मैकरेल
इसका नाम इसके बढ़िया स्वाद से पड़ा
आजी (हॉर्स मैकरेल) का इतिहास बेहद पुराना है, और कहा जाता है कि जोमोन काल से ही इसे भोजन के रूप में खाया जाता रहा है। साथ ही, ऐसी भी एक मान्यता है कि इसका स्वाद (“आजी” = स्वाद) इतना अच्छा होने की वजह से ही इसका नाम “आजी” पड़ गया — इस तरह यह प्राचीन काल से ही चहेती मछली रही है।
इसका टेक्सचर ठीक-ठाक सख़्त होता है, और चबाने पर नीली-पीठ वाली मछलियों जैसा ख़ास स्वाद (उमामी) उभरकर आता है। साथ ही, मौसम के समय इस पर अच्छी-ख़ासी चर्बी चढ़ जाती है और उसका स्वाद लाजवाब होता है।
आजी के गूदे में उमामी देने वाला तत्व इनोसिनिक एसिड भरपूर मात्रा में होता है, जिससे यह बेहद गहरे स्वाद वाली नेटा में से एक है। साथ ही, आजी के साथ वसाबी से ज़्यादा अदरक (शोगा) की जोड़ी जँचती है, इसलिए कई रेस्तराँ इसे कटी हुई अदरक ऊपर रखकर परोसते हैं।
“शिमा-आजी” नाम की एक मछली, जो सिर्फ़ ऊँचे दर्जे के रेस्तराँओं में ही नज़र आती है, वह भी आजी कुल की मछली है, पर उसे बिलकुल अलग मछली के रूप में देखा जाता है। शिमा-आजी को ज़्यादा ऊँचे दर्जे की मछली माना जाता है, और कहते हैं कि उसका स्वाद मा-आजी (आम हॉर्स मैकरेल) से कहीं ज़्यादा बढ़िया होता है। मा-आजी के मुक़ाबले इसका गूदा ज़्यादा सफ़ेद होता है, और मुँह में रखते ही फैलने वाला मीठापन तथा कुछ सख़्त टेक्सचर इसकी लोकप्रियता की वजह लगते हैं।
उद्गम: चिबा, क्यूशू, शिकोकु आदि मौसम: वसंत से गर्मी तक