Shako 蝦蛄
मैंटिस झींगा
सुशी जगत का माइक टाइसन
शाको (मैंटिस झींगा) झींगों और केकड़ों का रिश्तेदार है, और जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है, इसे “शाको कुल” (शाको-का) में रखा जाता है। हाल के वर्षों में इसकी पकड़ बेहद घट जाने के कारण कन्वेयर-बेल्ट सुशी रेस्तराँओं में यह दिखना बंद हो गया है।
देखने में इसका रंग फीका-धुँधला होता है, और सुशी नेटा के लिहाज़ से इसकी शक्ल असामान्य है, पर एक बार पकड़कर बना दो तो शारी (चावल) के साथ इसकी जोड़ी लाजवाब है। इसका गूदा अक्सर एक बार उबालकर ही बनाया जाता है। शक्ल के उलट इसमें बेहद उमामी भरा होता है, और उबालने से उसकी लज़्ज़त और भी गहरी हो जाती है।
शाको कहो तो सुशी कारीगरों के बीच “शाको → शाको (गैरेज/मोटर-शेड) → गैरेज” में बदलते हुए “गैरेज” नाम का स्लैंग होने के लिए मशहूर है।
शाको अपनी ज़बरदस्त घूँसे की ताक़त के लिए भी मशहूर है। सीप के खोल को घूँसे से आसानी से तोड़ देने वाले शाको के वीडियो कभी-कभी SNS पर वायरल होते हैं, इसलिए काफ़ी लोगों ने देखे होंगे। ज़रा-सी लापरवाही से हाथ पास ले जाओ तो यह इंसान के नाख़ून तक चूर कर देता है, ऐसा कहते हैं।
उद्गम: होक्काइदो, आइची, ओकायामा मौसम: वसंत से गर्मी तक